प्रथम स्पर्श
नयनों की आभा पलकों से
छलक, दूजी नयनों में प्रशस्त हुई ।
प्रश्न, उत्तर, प्रतिप्रश्न, प्रत्युत्तर
प्रति-स्मिता में परिणत हुई ।
हाँ, ना, शायद, अवश्य,
संशय के गुजरे क्षण-विशेष । (more)…
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नयनों की आभा पलकों से
छलक, दूजी नयनों में प्रशस्त हुई ।
प्रश्न, उत्तर, प्रतिप्रश्न, प्रत्युत्तर
प्रति-स्मिता में परिणत हुई ।
हाँ, ना, शायद, अवश्य,
संशय के गुजरे क्षण-विशेष । (more)…
gajab badhiyan likha hai. by the way happy birthday too…